साक्ष्य सेतु

यदि परमेश्वर अपूर्ण मनुष्यों को आज्ञा मानने को कहता है, तो क्या तोराह वास्तव में आज्ञाकारिता को असंभव मानती है?

पाठक वास्तविक मानवीय आज्ञाकारिता और निर्दोष पूर्णता में भेद कर सकेगा तथा बाद के औचित्य-दावे को मूसा की करने योग्य आज्ञा पर नहीं थोपेगा।

इस लेख से क्या स्थापित हुआ

तोराह मानती है कि मनुष्य आज्ञा मान सकते, विफल होने पर पश्चात्ताप कर सकते और लौट सकते हैं। व्यवस्थाविवरण 30 स्पष्ट रूप से कहता है कि आज्ञा न बहुत कठिन है, न दूर। यह इस दावे से अलग है कि कोई निर्दोष पूर्णता प्राप्त करता है।

  • सत्यापित: तोराह वास्तविक मानवीय आज्ञाकारिता का आदेश देती और उसे प्राप्त करने योग्य बताती है।
  • सत्यापित: तोराह यह भी मानती है कि मनुष्य पाप कर सकते हैं, इसलिए पश्चात्ताप और प्रायश्चित्त के वाचा-संबंधी साधन देती है।
  • बाद के ईसाई धर्मशास्त्र के रूप में संभव: मानवीय आज्ञाकारिता पौलुस द्वारा वर्णित धर्मी ठहराए जाने का प्रकार नहीं दे सकती।
  • नियंत्रक तोराह पाठ से खंडित: यह दावा कि मूसा सिखाता है आज्ञाएँ करना असंभव है।

जो प्रश्न अभी बाकी है

तोराह की बलिदानी श्रेणियाँ, नबियों के पश्चात्ताप-पाठ और रक्त के बिना क्षमा के उदाहरण सामने रखने पर गलातियों का व्यापक तर्क कितना टिकता है?

यह पुस्तक अगला कदम क्यों है

लेख का अगला उचित प्रमाण-क्षेत्र इस पुस्तक के विषय से सीधे मेल खाता है: व्यवस्था, विश्वास, खतना, सीनै, यरूशलेम और इस्राएल पर पौलुस के दावों की जाँच। इसलिए GALATIANS vs. THE HEBREW BIBLE: Paul’s War on Sinai उसी जाँच की अगली कड़ी है, कोई असंबंधित बिक्री नहीं।

पूरी जाँच जारी रखें

स्थानीय प्रश्न और उसके प्रमाण की सीमा स्पष्ट होने के बाद अगला कदम GALATIANS vs. THE HEBREW BIBLE: Paul’s War on Sinai है। यह पुस्तक व्यवस्था, विश्वास, खतना, सीनै, यरूशलेम और इस्राएल पर पौलुस के दावों की जाँच के लिए बनाई गई है।