साक्ष्य सेतु
यिर्मयाह 31 सीनै को रद्द नहीं करता: वह «ब्रीत ख़दाशाह» (ברית חדשה) किसके साथ बाँधता है?
लक्ष्य पाठ के सरल उत्तर—इस्राएल का घराना और यहूदा का घराना—को बनाए रखना और किसी अन्य समुदाय को जोड़ने वाले तर्क पर अलग प्रमाण-भार रखना है।
इस लेख से क्या स्थापित हुआ
यिर्मयाह स्वयं उत्तर देता है: इस्राएल के घराने और यहूदा के घराने के साथ। वाचा को किसी दूसरी प्रजा के पास स्थानांतरित करने वाले धर्मशास्त्र को यह समझाना होगा कि उसे नामित पक्ष बदलने की अनुमति क्यों है।
- प्रश्न: यिर्मयाह नई वाचा किसके साथ बाँधता है?
- उत्तर: इस्राएल के घराने और यहूदा के घराने के साथ।
- ईसाई सहभागिता का दावा: उसे बाद के धर्मशास्त्र या अन्य पाठों से सिद्ध करना होगा।
- तोराह-प्रथम नियम: यिर्मयाह को पूरा करने का दावा करते हुए उसकी संज्ञाएँ न बदलें।
जो प्रश्न अभी बाकी है
यिर्मयाह 31, तोराह के याजकत्व और प्रायश्चित्त के नियमों तथा नामित वाचा-पक्षों को नियंत्रण में रखने पर इब्रानियों के व्यापक दावों में क्या बचता है?
यह पुस्तक अगला कदम क्यों है
THE EPISTLE TO THE HEBREWS VS. THE HEBREW BIBLE अगला कदम है, क्योंकि यह खुले हुए प्रश्न को ठीक उसी व्यापक क्षेत्र तक ले जाती है: इब्रानियों के बेहतर वाचा, याजकत्व और प्रायश्चित्त संबंधी दावों की तोराह के नियमों के भीतर जाँच। यह विस्तार उसी साक्ष्य और प्रमाण-भार को बनाए रखता है; विषय को किसी असंबंधित बहस में नहीं बदलता।
शेष प्रश्न की व्यापक जाँच के लिए THE EPISTLE TO THE HEBREWS VS. THE HEBREW BIBLE पढ़ें। यह पुस्तक इब्रानियों के बेहतर वाचा, याजकत्व और प्रायश्चित्त संबंधी दावों की तोराह के नियमों के भीतर जाँच को यहाँ लागू उन्हीं स्रोत-आधारित कसौटियों पर जाँचती है।
