साक्ष्य सेतु
तो सीधा प्रश्न है: यिर्मयाह 31 में वर्णित वह संसार कहाँ है?
पाठक वर्तमान आरंभ और भावी पूर्णता के ईसाई मॉडल की संभावना स्वीकार करते हुए यह पूछ सकेगा कि क्या यिर्मयाह स्वयं कलीसिया-प्रथम आंशिक चरण बताता है।
इस लेख से क्या स्थापित हुआ
यिर्मयाह 31 केवल वाचा का नाम नहीं देता: वह भीतर लिखी तोराह, वाचा के सभी सदस्यों द्वारा हाशेम का ज्ञान, क्षमा, इस्राएल का स्थायी राष्ट्रत्व और पुनर्स्थापित यरूशलेम बताता है। ईसाई धर्म अभी आरंभ और बाद में पूर्णता प्रस्तावित कर सकता है, पर वर्तमान संसार स्पष्ट रूप से भविष्यवाणी से पूर्ण मेल नहीं खाता और यिर्मयाह स्वयं कलीसिया-प्रथम आंशिक चरण नहीं बताता।
- सत्यापित: यिर्मयाह 31 इस्राएल और यहूदा के साथ नई वाचा का वर्णन और ठोस वाचा-संबंधी परिणाम देता है।
- सत्यापित: वर्तमान संसार उन घोषित शर्तों को पूर्ण सार्वजनिक रूप में प्रदर्शित नहीं करता।
- संभव: ईसाई आरंभित अंत-काल-विज्ञान वास्तविक शुरुआत के बाद भावी पूर्णता प्रस्तावित कर सकता है।
- विवादित: इब्रानियों को अपनी मसीह-केंद्रित वाचा-व्यवस्था को उस शुरुआत के रूप में पहचानने का पाठीय अधिकार है या नहीं।
- यिर्मयाह 31 से असमर्थित: स्पष्ट कलीसिया-प्रथम चरण जिसमें नामित पक्ष और सार्वजनिक परिणाम टाले जाएँ, फिर भी पूर्ति का दावा किया जाए।
जो प्रश्न अभी बाकी है
यिर्मयाह 31, तोराह के याजकत्व और प्रायश्चित्त के नियम तथा नामित वाचा-पक्षों को सामने रखने पर इब्रानियों का व्यापक नई-वाचा तर्क कितना टिकता है?
यह पुस्तक अगला कदम क्यों है
लेख का अगला उचित प्रमाण-क्षेत्र इस पुस्तक के विषय से सीधे मेल खाता है: बेहतर वाचा, याजकत्व और प्रायश्चित्त के दावों की तोराह के नियमों के भीतर जाँच। इसलिए THE EPISTLE TO THE HEBREWS VS. THE HEBREW BIBLE उसी जाँच की अगली कड़ी है, कोई असंबंधित बिक्री नहीं।
पूरी जाँच जारी रखें
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