साक्ष्य सेतु

मत्ती होशे की इस्राएल-विषयक पंक्ति को यीशु पर क्यों लागू करता है?

पाठक मूल भविष्यवाणी और बाद की प्रतिरूपात्मक पुनरावृत्ति को अलग कर सकेगा: मत्ती का प्रयोग साहित्यिक हो सकता है, पर वह होशे को मूलतः यीशु की भविष्यवाणी नहीं बनाता।

इस लेख से क्या स्थापित हुआ

होशे 11 मूल संदर्भ में भविष्यवाणी नहीं, इस्राएल के निर्गमन की स्मृति है। मत्ती उसे यीशु पर लागू करता है क्योंकि वह यीशु को इस्राएल की कथा दोहराते दिखाता है। यह प्रतिरूपात्मकता है, मूल भविष्यवाणी नहीं।

  • सत्यापित: होशे 11:1 अतीत में मिस्र से निकाले गए इस्राएल की बात करता है।
  • सत्यापित: निर्गमन में इस्राएल परमेश्वर का पुत्र कहलाता है।
  • सत्यापित: मत्ती उसी भाषा को मिस्र से यीशु की वापसी पर लागू करता है।
  • सर्वोत्तम ईसाई व्याख्या पुनरावृत्ति या प्रतिरूपात्मकता है: यीशु इस्राएल की कथा को दोहराता है।
  • तोराह-प्रथम निष्कर्ष: प्रतिरूपात्मकता बाद की साहित्यिक रचना हो सकती है; वह होशे 11 को यीशु के विषय में मूल भविष्यवाणी नहीं बनाती।

जो प्रश्न अभी बाकी है

मत्ती के उद्धरणों, उनके मूल हिब्रू संदर्भों और निकाले गए पूर्ति-दावों को सामने रखने पर मत्ती का व्यापक मसीहाई तर्क कितना टिकता है?

यह पुस्तक अगला कदम क्यों है

लेख का अगला उचित दायरा इस पुस्तक के विषय से सीधे मेल खाता है: मत्ती के उद्धरणों, पूर्ति के दावों और मसीहाई तर्कों की हिब्रू पाठ के सामने जाँच। इसलिए THE GOSPEL OF MATTHEW UNDER THE TORAH TEST उसी जाँच की अगली कड़ी है, कोई असंबंधित बिक्री नहीं।

इस प्रश्न के व्यापक प्रमाण-क्षेत्र को स्पष्ट करने के बाद अगला कदम THE GOSPEL OF MATTHEW UNDER THE TORAH TEST है। यह पुस्तक मत्ती के उद्धरणों, पूर्ति के दावों और मसीहाई तर्कों की हिब्रू पाठ के सामने जाँच के लिए बनाई गई है।