साक्ष्य सेतु
क्या मसीहा इस्राएल की वाचा को दृढ़ करता है या इस्राएल को किसी नए धर्मशास्त्र की ओर मोड़ता है?
पाठक यह जाँच सकेगा कि वाचा-निष्ठा को दूसरी दिशा देने वाला कोई मसीहाई दावा उन सार्वजनिक नबी-कसौटियों का उत्तर देता है या नहीं।
इस लेख से क्या स्थापित हुआ
नबी मसीहाई भविष्य को पुनर्स्थापित इस्राएल, सम्मानित तोराह, परमेश्वर के मार्ग सीखती जातियों और हाशेम के ज्ञान तक पहुँचे संसार के रूप में वर्णित करते हैं। वाचा-निष्ठा की दिशा बदलने वाले मसीहाई दावे को इन सार्वजनिक कसौटियों का उत्तर देना होगा।
- सत्यापित: नबी मसीहाई पुनर्स्थापना को तोराह, इस्राएल के एकत्रीकरण, दाऊदी शासन और हाशेम के सार्वभौमिक ज्ञान से जोड़ते हैं।
- ईसाई दावा: यीशु के प्रति निष्ठा ही वाचा-निष्ठा की वास्तविक पूर्ति है, क्योंकि यीशु परमेश्वर को अद्वितीय रूप से प्रकट करता है।
- तोराह-प्रथम निष्कर्ष: पहचान के उसी दावे को उसके अपने प्रमाण के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
जो प्रश्न अभी बाकी है
मसीहाई राजा और युग के नबी-वर्णनों, प्रस्तुत प्रमाण और वास्तविक परिणामों को सामने रखने पर मूसा तथा इस्राएल की सामूहिक नबी-साक्षी के सामने व्यापक ईसाई दावा क्या टिकता है?
यह पुस्तक अगला कदम क्यों है
The Warnings of the Prophets: Why Christianity Fails the Collective Prophetic Witness of Israel अगला कदम है, क्योंकि यह खुले हुए प्रश्न को ठीक उसी व्यापक क्षेत्र तक ले जाती है: मूसा और इस्राएल की सामूहिक नबी-साक्षी के सामने ईसाई दावों तथा टाली गई मसीहाई पूर्तियों की जाँच। यह विस्तार उसी साक्ष्य और प्रमाण-भार को बनाए रखता है; विषय को किसी असंबंधित बहस में नहीं बदलता।
शेष प्रश्न की व्यापक जाँच के लिए The Warnings of the Prophets: Why Christianity Fails the Collective Prophetic Witness of Israel पढ़ें। यह पुस्तक मूसा और इस्राएल की सामूहिक नबी-साक्षी के सामने ईसाई दावों तथा टाली गई मसीहाई पूर्तियों की जाँच को यहाँ लागू उन्हीं स्रोत-आधारित कसौटियों पर जाँचती है।
