साक्ष्य सेतु
यदि व्यवस्थाविवरण 17 कानूनी अधिकार इस्राएल के भीतर रखता है, तो कलीसिया ने किस तोराह-प्रक्रिया से वाचा-व्यवस्था को दोबारा परिभाषित करने का अधिकार लिया?
पाठक यह देख सकेगा कि व्यवस्थाविवरण कौन-सा अधिकार देता है, कौन-सा नहीं देता और ईसाई धर्म को किस अपवाद का स्वतंत्र प्रमाण देना होगा।
इस लेख से क्या स्थापित हुआ
व्यवस्थाविवरण 17 में कोई प्रक्रिया कलीसिया को यह अधिकार नहीं देती। केवल इससे ईसाई धर्म का झूठा होना अपने आप सिद्ध नहीं होता।
- सत्यापित: व्यवस्थाविवरण 17 इस्राएली कानूनी निर्णय का बाध्यकारी अधिकार तोराह की वाचा-संस्थाओं के भीतर रखता है।
- सत्यापित: वह किसी बाद की गैर-यहूदी कलीसियाई संस्था को इस्राएल की वाचा-व्यवस्था फिर से परिभाषित करने का अधिकार नहीं देता।
- ईसाई दावा: यीशु और प्रेरितों को उससे उच्च दिव्य अधिकार है जो नई वाचा की व्यवस्था स्थापित करता है।
- इसलिए वास्तविक प्रश्न: ईसाई धर्म को इस अधिकार को तोराह की पहले से मौजूद कसौटियों पर सिद्ध करना होगा, न कि पहले से मान लेना होगा।
जो प्रश्न अभी बाकी है
नामित तोराह या नबी-पाठ और उसके कानूनी या वाचा-संबंधी कार्य को नियंत्रण में रखने पर ईसाई सिद्धांतों, पद्धतियों और ऐतिहासिक दावों में क्या बचता है?
यह पुस्तक अगला कदम क्यों है
Court Case Christianity: A Torah-Law Indictment of Doctrine, Method, and History अगला कदम है, क्योंकि यह खुले हुए प्रश्न को ठीक उसी व्यापक क्षेत्र तक ले जाती है: ईसाई सिद्धांतों, पद्धतियों और ऐतिहासिक दावों की तोराह की श्रेणियों के अंतर्गत कानूनी जाँच। यह विस्तार उसी साक्ष्य और प्रमाण-भार को बनाए रखता है; विषय को किसी असंबंधित बहस में नहीं बदलता।
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